आदिवासी अधिकारों के लिए आइपीएफ ने उ0 प्र0 सरकार को दूसरा पत्र भी भेजा

लखनऊ, 24 सितम्बर 2022,  
 
        वनाधिकार कानून में आदिवासियों और परम्परागत वन निवासियों को पुश्तैनी वन भूमि पर अधिकार देने, चंदौली जनपद की आदिवासी खरवार, चेरो, पनिका जाति का नृजातीय सर्वे कराकर जनजाति का दर्जा देने, चंदौली जनपद की पंखा, पनिका जाति को अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी करने, सोनभद्र के आदिवासी बाहुल्य दुद्धी तहसील में आदिवासी लड़कियों के लिए आवासीय डिग्री कालेज खोलने, बभनी, म्योरपुर ब्लाक समेत हर ब्लाक में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय खोलने, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली के नौगढ़ को वन बंधु कल्याण योजना के तहत शामिल करते हुए इन जगहों का शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक विकास करने और इन क्षेत्रों में आदिवासी दलित बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर निःशुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र व निःशुल्क नर्सिंग, फार्मेसी कोर्स चलाने की मांगों पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार को दूसरा पत्र भी भेजा। प्रेस को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि आदिवासी-दलित बाहुल्य सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली का नौगढ़ सरकारी उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, आवागमन के साधनों की बुनियादी सुविधाएं नहीं है। इस क्षेत्र में सामाजिक तनाव का बड़ा कारण भूमि विवाद रहा है। भूमि विवाद के कारण ही उभ्भा जैसा आदिवासियों का नरसंहार हुआ। भूमि विवाद में प्रमुख रूप से वन भूमि विवाद रहा है। इसके समाधान के लिए बने वनाधिकार कानून को सरकारों ने विफल कर दिया। हमारे संगठन द्वारा हाईकोर्ट से आदेश कराने के बाद सोनभद्र और चंदौली में वनाधिकार के दावों का पुनः परीक्षण कराया जा रहा है मगर मिर्जापुर में यह भी नहीं हो रहा है। जिन जिलों में पुनः परीक्षण हो भी रहा है उसमें अनिमितताएं है। सोनभद्र में अन्य परम्परागत वन निवासियों के दावे का सत्यापन नहीं किया जा रहा और चंदौली में दावेदारों से सादे कागज पर दस्तखत कराए जा रहे है। एक बार फिर दावों का विधि विरूद्ध निस्तारण करने की कोशिश हो रही है। इसलिए सरकार से इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए हस्तक्षेप की मांग की गई है।