कानून के राज के लिए
जन अधिकार अभियान
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत तमाम वाम-जनवादी ताकतों द्वारा समर्थित
 का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय संयोजक, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ)
द्वारा
10 जून से 19 जून 2013 तक दस दिवसीय उपवास
समयः 10 जून 2013 को अपराहन 1 बजे से प्रारम्भ          स्थानः विधानसभा के सामने, लखनऊ
जन अधिकार अभियान के मुद्दे
1- उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहद खराब है। यहां माफिया-पुलिस-गुण्डाराज चल रहा है। प्रदेश में कानून का राज हो - महिलाओं, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और दलितों समेत सभी नागरिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की गारण्टी हो।
2- (क) न्यायमूर्ति आर. डी. निमेष कमीशन की रिपोर्ट को विधानसभा में रखने और उसकी सिफारिशों के अनुरूप एक्शन टेकन रिपोर्ट लेने की बात अखिलेश सरकार ने देर से स्वीकार की है। बहरहाल अब सरकार अपनी घोषणा के अनुसार खालिद मुजाहिद की पुलिस हिरासत में हुई मौत और गिरफ्तारी के प्रकरण की सीबीआई से विवेचना कराना जल्द सुनिश्चित करे।
    (ख) आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार मुस्लिम नौजवानों के मुकदमों के निस्तारण के लिए विशेष अदालतों का गठन हो और जितनी जल्दी हो सके जो निर्दोष हो उनकी रिहाई और पुनर्वास की गारंटी हो।
    (ग) अखिलेश सरकार के सालभर के शासनकाल में 27 दंगे हो चुके हंै, भारतीय प्रेस परिषद ने भी फैजाबाद-अयोध्या दंगें के लिए प्रशासन को जिम्मेदार माना है, उ0 प्र0 सरकार दंगों की न्यायिक जांच कराए और जबाबदेह पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दण्डि़त करे।
    (घ) यह दुखद है कि 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा में पुलिस-पीएसी द्वारा किए गए मुसलमानों के कत्लेआम के तीसहजारी कोर्ट में चल रहे मुकदमे का अभी तक निस्तारण नहीं हुआ। इसलिए उ0 प्र0 सरकार इस मुकदमें का जल्द निपटारा करना सुनिश्चित करे और पीडि़त परिवारों को न्यायोचित मुआवजा दे।
3- बिजली दरों को बढ़ाने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए और प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। दरअसल प्रदेश में पैदा हुआ गंभीर बिजली संकट भ्रष्टाचार की देन है। प्रदेश की सर्वाधिक बिजली उत्पादन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की अनपरा-ओबरा समेत अन्य इकाइयां पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रही हैं, क्योकि इसके मूल में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी प्रथा है। ठेकेदारी प्रथा खत्म हो, ठेका मजदूरों का विनियमितीकरण किया जाए, सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली उत्पादन इकाइयों को और मजबूत बनाया जाए और उनका विस्तार किया जाए।
4- समाजवादी पार्टी अपने घोषणापत्र के वायदे के अनुसार लागत मूल्य का पचास प्रतिशत जोड़ कर बुआई के पहले विभिन्न फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर किसानों की उपज की खरीद को सुनिश्चित करे। किसान की उपज का लागत मूल्य निर्धारित करने के लिए तत्काल प्रभाव से आयोग का गठन करे। गन्ना, गेहूॅ और धान की खरीद का तत्काल भुगतान हो और भुगतान न करने वालों को दण्डि़त किया जाए।
5- अखिलेश सरकार ने 17 अतिपिछड़ी जातियों को दलितों में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है। अतिपिछड़ों को दलितों से लड़ाने की इस नीति से सरकार बाज आए और अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में से अतिपिछड़ों का कोटा अलग किया जाए साथ ही रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिर्पोट के अनुसार पिछड़े मुसलमानों का कोटा भी अलग किया जाए। धारा 341 को संशोधन कर दलित मुसलमानों व ईसाइयों को अनुसूचित जाति में षामिल करने के लिए प्रदेश सरकार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे। कोल जैसी आदिवासी जातियों को जनजाति में षामिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेष के अनुसार गोड़, खरवार जैसी आदिवासी का दर्जा पायी जातियों के लिए चुनाव में सीट आरक्षित की जाएं।
6- 14 अरब से भी ज्यादा के स्मारक घोटाले, जिसमें मिर्जापुर में अवैध खनन प्रमाणित हुआ है उसमें लोकायुक्त द्वारा दिनांक 20 मई 2013 को की गयी संस्तुतियों ’प्रकरण की विवेचना छः माह में सीबीआई या विशेष जांच दल से कराने‘ को प्रदेश सरकार द्वारा तत्काल स्वीकार किया जाए और इस घोटाले में शामिल सम्बंधित मंत्री समेत सभी लोगों के विरूद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें दण्डि़त किया जाए। इस संदर्भ में यह भी नोट किया जाए कि उ0 प्र0 में अवैध खनन धड़ल्ले से बड़े पैमाने पर चल रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेष का सम्मान किया जाए और बिना पर्यावरण विभाग की अनुमति के चल रहे अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाए। अवैध खनन के पूरे मामले की सीबीआई से जांच भी करायी जाए।

7- मनरेगा को समाप्त करने की कोशिश में लगी उ0 प्र0 सरकार अपनी मजदूर-गरीब विरोधी कार्यवाही को बंद करे। किसानों और मजदूरों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बने इस कानून को लागू किया जाए और हर हाल में 100 दिन के रोजगार की और रोजगार न दे पाने की स्थिति में बेकारी भत्ता देने एवं 15 दिन में मजदूरी भुगतान की गारंटी की जाए। जिन जिलों में 100 दिन काम की गारंटी न हो वहां के जिलाधिकारी को दोषी माना जाए और उन्हंे दण्डि़त किया जाए। मनरेगा के तहत काम के दिनों में वृद्धि की जाए, न्यूनतम वेतन को मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए।
8- वनाधिकार कानून को लागू किया जाए और आदिवासियों व वनाश्रित लोगों को जिस जमीन पर वह काबिज हंै, बेदखल न किया जाए और अभियान चलाकर वनाधिकार कानून के तहत उन्हें उसका मालिकाना हक दिया जाए। औद्योगिक विकास के कारण विस्थापित हुए लोगों से किए गए समझौतों को पूरी तौर पर लागू किया जाए।
9- प्रदेश में नेशनल हाईवे की मौजूदगी में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी योजनाओं की कतई जरूरत नही है, इसे पूर्णतया रद्द किया जाए क्योकि इन सड़क योजनाओं का मकसद यातायात के सवाल को हल करना नहीं बल्कि किसानों की उपजाऊ भूमि को छीनकर बिल्डरों, पंूजी घरानों के हवाले करना है जिससे कि वे वहां टाउनशिप और फार्म हाउस बनाकर बेहिसाब मुनाफा कमाएं।
10- उ0 प्र0 छोटे मझोले किसानों का प्रदेश है यहां कांट्रैक्ट फार्मिंग की इजाजत अखिलेश सरकार किसी भी हाल में न दे और कोआपरेटिव खेती के लिए तत्काल विशेष सुविधाएं देने की गारंटी करें। जब तक देश में भूमि उपयोग की समग्र नीति ‘भूमि उपयोग आयोग‘ का गठन करके केन्द्र सरकार द्वारा नहीं बना दी जाती तब तक कारपोरेट हित के लिए सरकार या कारपोरेट द्वारा किसानों की जमीन की खरीद पर पूर्णतया प्रतिबंध हो, साथ ही उ. प्र. सरकार इस आशय का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे।
11- रोजगार के अधिकार को संविधान के नीति निर्देशक तत्व से हटाकर मौलिक अधिकार बनाने के लिए उ0 प्र0 शासन विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे। रोजगार पैदा करने के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाएं और भर्ती पर लगी रोक हटायी जाए। प्रदेश में बंद सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को पुनर्जीवित कर इन्हें पूरी क्षमता से चलाया जाए और सार्वजनिक उद्योगों को बेचने की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को दण्डि़त किया जाए।  
12- मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जनपद में माओवाद का प्रभाव अब समाप्तप्राय है। आदिवासी, गरीब समाज के लोग, जो व्यवस्था से अलगाव और विक्षोभ की वजह से माओवाद के प्रभाव में चले गए थे, उस क्षेत्र में लगातार चले लोकतांत्रिक आंदोलन की वजह से प्रभावित होकर राजनीति की मुख्यधारा में लौट आए हैं। फिर भी माओवाद से निपटने के नाम पर वहां गरीबों का दमन हो रहा है। पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही इस तरह की कार्रवाइयों पर रोक लगनी चाहिए। माओवादी होने के नाम पर चल रहे गैगस्टर व गुण्ड़ा एक्ट समाप्त किया जाए और जेल में बंद सभी लोगों को, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है, उनकी जमानत हो और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। ज्ञातव्य हो कि पूर्व माओवादी बासमती कोल सदस्य समाजवादी पार्टी को उ0 प्र0 सरकार ने महिला आयोग का सदस्य बनाया है।
13- खाद्यान्न घोटाला अभी भी उ. प्र. में चल रहा है, इस पर रोक लगायी जाए और जबाबदेह लोगों को दण्ड़ दिया जाए। ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले समेत सभी घोटालों की समयबद्ध जांच हो और दोषियों को सजा मिले और उनकी सम्पत्ति से लूटे हुए धन की वसूली की जाए।
14- खाद्य सुरक्षा कानून को तत्काल बनाया जाए और इसमें एपीएल-बीपीएल श्रेणी को खत्म कर हर नागरिक को 50 किलो राषन 2 रूपए की दर पर दिया जाए।
15- बुनकरों के कर्जे माफ किए जाएं, उन्हे मुफ्त बिजली दी जाए और विशेष सर्वे कराकर उन्हें बीपीएल कार्ड दिये जाएं।
16- प्रदेश में आंगनबाड़ी, आशा, मिड़ डे मील, मनरेगा कर्मियों, शिक्षामित्र, वित्त विहीन शिक्षक और संविदा श्रमिक जीविका के गम्भीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इन कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और जब तक यह न हो उन्हें कम से कम 10 हजार रूपए न्यूनतम मजदूरी दी जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आशा व आगंनबाडि़यों के सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
17- भूमि सुधार नीति को लागू किया जाए और हर गरीब के लिए आवास की गारंटी की जाए।
18- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बाजारीकरण बंद किया जाए इसमें सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए और जनता को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जाएं।
दिनकर कपूर, संगठन प्रभारी, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ), उ0 प्र0, सम्पर्क पताः 4 माल एवेन्यू, निकट सत्संग भवन, लखनऊ, मो0 09450153307 द्वारा 7 जून 2013 को जारी।