1. जनवादी अधिकारों और स्वतंत्रता पर हमले को शिकस्त देना और सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून समेत सभी विशेष कानूनों का, जो संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक दायरे को सीमित करते हैं और राज्य को बल प्रयोग के एकाधिकार का दुरुपयोग करने में सक्षम बनाते हैं, खत्म करने के लिए संघर्ष।
2. कृषि पर कार्पोरेट कब्जे को विफल करना। भूमि, जल, बीज, जंगल, पहाड़, खनिजों के कारपोरेटीकरण का प्रतिरोध करना, सहकारिता को प्रोत्साहन देना तथा इन मूलभूत संसाधनों के मालिकाने तथा कामकाज के समाजीकरण की ओर बढ़ना। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का कानूनी अधिकार।
3. सामुदायिक स्थलों, विशेषकर वन तथा आदिवासी आबादी व जमीन पर कारपोरेट अतिक्रमण व कब्जे को शिकस्त देना, आदिवासी सामुदायिक अधिकारों तथा आजीविका की हिफाजत करना, वन संसाधनों के सामुदायिक मालिकाने तथा प्रबंधन की रक्षा करना।
4. उन नीतियों को शिकस्त देना जो खनिज संसाधनों की कारपोरेट लूट को मदद पहुंचाती है तथा आदिवासियों के जीवन, आजीविका तथा रिहायशी आबादी का विनाश करती है।
5. संघवाद, सामाजिक न्याय, आर्थिक लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति एआईपीएफ प्रतिबद्ध है।
6. विश्व व्यापार संगठन (वर्ल्ड ट्रेड आर्गनाइजेशन) के अंतर्गत ‘‘कृषि विषयक समझौता‘‘ (एग्रीमेंट आन एग्रीकल्चर) को शिकस्त देना, कृषि उत्पादन और व्यापार में दक्षिण देशों के सहयोग के माध्यम से किसान केन्द्रित विकल्प के लिए संघर्ष।
7. विकास की वैकल्पिक नीतियों के लिए संघर्ष जो न केवल मुख्यधारा की ‘‘भूमण्डलीकृत विकास’’ की रणनीति को नकारती हैं बल्कि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती हैं, शैक्षिणिक व सामाजिक रूप से उन्नत वर्गों की तुलना में पिछड़े वर्गों, व्यक्तियों व विभिन्न अंचलों की समता और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करती हंै। इस विकास नीति के अमल से औद्योगीकरण की पद्धति और दिशा बदलेगी, इसका मतलब यह होगा कि ‘‘वैश्विक दृष्टि से प्रतिस्पर्धी” उद्योगों की मोहग्रस्तता से मुक्ति मिलेगी और रोजगारपरक तकनीकी पर आधारित व जनोपयोगी दिशा वाले उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक मजबूती और रणनीतिक सुरक्षा के लिए अनुसंधान और तकनीक के बजट को बढाया जायेगा। आधुनिक औद्योगिक जरूरत के अनुरूप तकनीकी संस्थानों को उन्नत करना।
8. जीएसटी व्यवस्था में सुधार कर उसे केवल अंतिम बिंदु पर वसूला जाना चाहिए। इसे केवल विलासिता के अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं पर लगाया जाए और आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए। इससे महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM), 2003 को रद्द किया जाना चाहिए ताकि यह हाशिए के वर्गों और आवश्यक सामाजिक सेवाओं के लिए वित्तीय बाधा न बने।
9. स्वास्थ्य एवं शिक्षा के व्यापारीकरण की प्रक्रिया का अन्त करना। स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर समुचित बजट। भोजन व अन्य जरूरी चीजों तक जनता की सीमित पहुंच वाली तथा भेदभावपूर्ण महंगी मौजूदा व्यवस्था की जगह स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन और अन्य जरूरी चीजों के प्रावधान के लिए सर्वांगीण समतापरक, सुलभ सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थापना।
10. सुपर रिच की सम्पत्ति पर समुचित टैक्स लगाया जाए और इसे सामाजिक सुरक्षा पर खर्च किया जाए। एक राष्ट्रीय वेतन और आय नीति जो विभिन्न क्षेत्रों व वर्गों के बीच असमानता में भारी कमी करे।
11. रोजगार का अधिकार तथा गरिमापूर्ण जीवन स्तर के लिए कानूनी उपायों तथा उपयुक्त आर्थिक नीतियों की पहल लेना।
12.चारों लेबर कोड को रद्द करना। बिजली, बैंकिंग, बीमा, रेलवे, रक्षा, बंदरगाह, कोयला, गैस और पेट्रोलियम जैसे जन उपयोगी महत्वपूर्ण क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाना। मजदूरों को सम्मानजनक वेतन मिले और ठेका/आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थाई करना। स्कीम वर्कर्स को सरकारी नौकरी देना। तकनीकी विकास के अनुरूप रोजगार बढ़ाने के लिए कार्य सप्ताह कम किया जायेगा।
13. पहचान आधारित भेदभाव से प्रभावित सामाजिक समूहों - जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं - का शिक्षा, न्यायपालिका, मीडिया, सरकारी नौकरियों और सभी प्रशासनिक एवं निजी क्षेत्रों में उचित प्रतिनिधित्व और संसाधनों में अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। आरक्षण का निजी क्षेत्र तक विस्तार करना। साथ ही, जनगणना में जनजातीय धर्मों के लिए एक अलग कॉलम पुनः शामिल किया जाना चाहिए, जैसा कि 1961 से पहले किया जाता था, ताकि उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का सम्मान किया जा सके।
14. सरकारी नीतियों का निर्माण इस तरह किया जाना चाहिए कि वे भारत के विविध सामाजिक समूहों की सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक और आदिवासी पहचान की रक्षा करें, न कि शहर-केंद्रित, नौकरशाही आधारित एकरूपता थोपने वाले मॉडल को बढ़ावा दें। वर्तमान नीतिगत ढांचे, जो इसी प्रकार की सोच पर आधारित हैं, अक्सर पारिस्थितिक संतुलन, पर्यावरणीय स्थिरता और सांस्कृतिक विविधता की उपेक्षा करते हैं - विशेष रूप से यह प्रवृत्ति आवास संबंधी नीतियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ये नीतियाँ भारतीय जनता की वास्तविक जीवन स्थितियों के अनुकूल नहीं हैं।
15. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को विनियमित करने के लिए केंद्रीय कानून बनाया जाए। गैर-बैंकिंग कंपनियों द्वारा की जा रही लूट को रोकने के लिए अवैध जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम (BUDS Act 2019) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
16. भारी पैमाने पर व्याप्त धनबल व बाहुबल के खात्में के लिए, आनुपतिक प्रतिनिधित्व के लिए, जनतंत्रीकरण की प्रक्रिया को स्वच्छ और गहरा करने के लिए एक मुकम्मल चुनाव सुधार।
17. प्रशासनिक ढांचे पर जन-नियंत्रण तथा निगरानी, खासतौर पर आम लोगों के रोजमर्रे के कामों के निस्तारण के लिए।
18. डेटा सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। निजता का उल्लंघन किसी भी कीमत पर न हो। इंटरनेट को निःशुल्क सार्वजनिक साधन बनाया जाए।
19. उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद विरोधी लम्बे संघर्ष से हासिल भारत की मूल संकल्पना को ही चुनौती देने वाली साम्प्रदायिक फासीवादी ताकतों के खिलाफ लड़ना तथा शिकस्त देना।
20. धर्म जिसका स्वाभाविक क्षेत्र (डोमेन) निजी क्षेत्र है उसमें उसे बनाए रखना और उसका राज्य तथा राजनीति से पूर्ण अलगाव करना।
21. ऐतिहासिक तौर पर उभरी अपनी सांस्कृतिक तथा राजनीतिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए उपराष्ट्रीयताओं तथा सीमावर्ती राज्यों के संघर्षों का समर्थन एवं भारतीय राज्य के अधीन पूर्ण स्वायत्तता की आकांक्षा का समर्थन।
22. भारतीय वित्तीय व्यवस्था की स्वायत्तता को मजबूत करना तथा इसे वैश्विक वित्तीय पूंजी की अस्थिरता और लालच से बचाना, आंचलिक वित्तीय सहयोग जैसे क्षेत्रीय मौद्रिक संघ के लिए काम करना। देश की सम्प्रभुता की रक्षा करना।
23. अमरीकी रणनीतिक संश्रय से निर्णायक अलगाव और अमरीकी सैन्यवाद का विरोध, विशेषकर पश्चिम एशिया में अमरीकी-इजराइली सैन्यवाद और अमेरीका-इजराइल प्रायोजित इस्लामोफोबिया का पर्दाफाश करना और उसे शिकस्त देना।
24. महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों विशेषकर चीन तथा पाकिस्तान के प्रति अंधराष्ट्रवादी तथा युद्धोन्मादी नीतियों व पैंतरेबाजी के खिलाफ लड़ना और इसे शिकस्त देना एवं भारतीय उपमहाद्वीप, एशिया व सम्पूर्ण विश्व में शांति और सहयोग के लिए प्रयास करना।
25. तेजी से बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु परिवर्तन, जीवन रक्षक ओजोन परत के क्षय, ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्री जलस्तर में वृद्धि व नदियों के सूखने, बाढ़ व सूखा, जैवविविधता व पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव जैसे गंभीर कारक होंगे। प्रौद्योगिकी विकास व इस्तेमाल इस तरह हो ताकि इन गंभीर खतरों का दुष्प्रभाव न्यूनतम किया जा सके। कृषि, उद्योग, आवास आदि क्षेत्रों में ऐसी नीतियां बनाने में हरित नौकरियों (ग्रीन जॉब्स) की महत्वपूर्ण भूमिका है।
26. कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली एक नवीन ऊर्जा नीति जो हमारे रणनीतिक, कृषि व औद्योगिक नीतियों की नयी दिशा के अनुरूप हो। तेल, गैस से समृद्ध पश्चिम एशिया व मध्य एशिया के देशों के साथ चुनिंदा रणनीतिक सहयोग, शंघाई सहयोग संगठन के साथ घनिष्ठ सहयोग।